सवाल अपनी जिंदगी का है, इस बात का ज्ञान जिसे भी है वो भली-भाँति हेलमेट का इस्तेमाल कर रहा है लेकिन उन लोगों का क्या जिनके लिए हेलमेट मुसीबत से ज्यादा कुछ नहीं ? पुलिस चालान पर चालान काट रही है। उसे इस बात से कोई सरोकार नहीं की उसकी इस घेराबंदी से केवल डर पैदा हुआ है, जागरूकता नहीं। आज शहर और उससे लगे इलाकों में सड़क के किनारे सजी हेलमेट की दुकानों पर किस क्वालिटी का हेलमेट बिक रहा ये कोई पूछने वाला नहीं। सिर्फ आपकी खोपड़ी के ऊपर एक और खोपड़ी लगी होनी चाहिए। उस गुणवत्ताविहीन हेलमेट से आपकी सुरक्षा होगी तय नहीं लेकिन उसके साथ रहने से पेट्रोल मिलेगा और खाकी वालों की तिरछी नज़र से बचाव होगा।
अक्सर हादसों की वजह जब भी सामने आती है नशा मुख्य कारण होता है। हेलमेट पहनाने और पहनने वाले भी समझते हैं। असावधानी और नशा आपको हेलमेट साथ होने पर भी आपकी जान बचा दे जरूरी नहीं। चूँकि सरकारी फरमान है और बात ऊपर से लेकर नीचे तक फायदे की है इस कारण आपको, हम सबको हेलमेट पहनाया जा रहा है। जिस शहर में यातायात की व्यवस्था और उसके सुचारु चलन के इंतजाम आज तक नहीं किये जा सके वहां इन दिनों सिर्फ हेलमेट की आड़ में पहले घेराबंदी फिर ....! बेतरतीब यातायात, ओवरलोड ऑटो, सिमित गति से तेज भागते भारी वाहन पुलिस को परेशान नहीं करते। पुलिस सिर्फ हेलमेट के पीछे पड़ी है। नियमों की धज्जियां उसकी आँखों के सामने हर चौक-चौराहे पर उड़ रहीं लेकिन हाथ में डंडा और रसीद बुक लिए साहब की नज़र बिन हेलमेट वाली खोपड़ी पर होती है। आज के हालात बताते हैं 'बिन हेलमेट सब सूंन' !

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Sahi pakdey hai..
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