अलविदा 'बमेरा'
"ख़बर मिली है 'बमेरा' के रुख़सत होने की । कभी मुलाक़ात नहीं हुई पर ख़बर मिलते ही मन ख़राब हो गया । मैं 'बमेरा' से मिलना चाहता था, मगर पिछले दिनों ही मालूम हुआ कि अब वो किसी को मिलता नहीं । वजह, बीमारी और उम्र । आज सुबह-सुबह जब लोग उसकी सल्तनत में सैर पर व्यस्त थे उसी दौरान 'बमेरा' ने आख़री साँसें लीं और हमेशा के लिए बाँधवगढ़ को अलविदा कह गया । तुमसे कभी मिला नहीं, पर तुम्हारे नहीं होने की ख़बर से आहत हूँ 'बमेरा'... 'बमेरा' तुम गए नही, यादों में सदा रहोगे । "
कुछ देर पहले ही मित्रों के जरिये ख़बर मुझ तक आई 'बमेरा' नहीं रहा । वजह बताई गई बीमारी और उम्र के साथ आई कमजोरी । 'बमेरा' उस बाघ का नाम है जिसने बाँधवगढ़ नेशनल पार्क को देश में अलग पहचान दिलाई । 'बमेरा' को जिसने भी देखा है उसकी ख्वाहिश हर बार 'बमेरा' से फिर मुलाक़ात की रही होगी । मुझे अफ़सोस है उससे मुलाक़ात नही हो सकी । उम्र भर इस बात की कमी भी खलती रहेगी 'बमेरा' आखिर मेरे कैमरे में क्यूँ नही कैद हुआ ? हो सकता है उसकी,मेरी मुलाक़ात का वक्त मुक़र्रर ना रहा हो । बाँधवगढ़ का बेताज बादशाह 'बमेरा' पिछले तीन साल से इन्क्लोजर में था । साल 2004 में जन्मा 'बमेरा' उम्र की तय सीमा तक नही जी सका । उसे और उसके विषय में जानकारी रखने वालों ने बताया करीब 4 साल पहले उसके पैर टूट गए और वो कमजोर हो गया । ख़बर आज सुबह करीब 9:45 बजे इन्क्लोजर से बाहर आई 'बमेरा' नहीं रहा ।
यक़ीन मानिये 'बमेरा' सबको दुःखी कर गया । उसकी चुस्ती फुर्ती और बिंदास अंदाज से वाकिफ़ वन्य प्रेमी बताते हैं 'बमेरा' 7 फुट का था । वो जिस रास्ते गुजरता सिर्फ 'बमेरा' की दहशत और जंगल की ख़ामोशी में खौफ़ का साया नज़र आता । करीब 105 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैला बाँधवगढ़ नेशनल पार्क आज भी बाघों की बहुलता के लिए देश में अलग पहचान रखता है, लेकिन बमेरा.. 'बमेरा' था । उसकी बिदाई में आज बाँधवगढ़ नेशनल पार्क का पूरा परिवार शामिल हुआ । दुःख की इस घड़ी में कुछ लोगों को इस बात की संतुष्टि भी थी कि 'बमेरा' का वारिश अभी बाँधवगढ़ में पर्यटकों के बीच मौजूद है । मुझे 'बमेरा' नहीं मिला लेकिन उसका बेटा मेरे साथ तस्वीर के रूप में हर वक्त साथ होता है । पिछले ही महीने की बात है, 27 अप्रैल को मैंने और साथियों ने 'बमेरा' का जिक्र किया था । हम बाँधवगढ़ में बाघों की तस्वीर खीचते फिर 'बमेरा' के राज की चर्चा करते । उसी दौरान 'बमेरा' का बेटा न्यू कनकट्टी (बाघिन) के साथ मेटिंग में था । मैंने और साथियों ने तस्वीरें लीं और जल्द ही बाँधवगढ़ फिर लौटने की चर्चा की ।
.... क्या लिखूँ कुछ सूझता नही, दुःख है 'बमेरा' के रुख़सत होने का । चिंता है मध्यप्रदेश में लगातार बाघों के आंकड़ो में आती कमी पर । पिछले कुछ महीने में मध्यप्रदेश में कई बाघों की मौत हुई... सरकार भी चिंतित हुई । आज बाँधवगढ़ नेशनल पार्क के परिवार का हर सदस्य 'बमेरा' की मौत से स्तब्ध है, दुःखी है । मैं सिर्फ इतना ही कहूँगा 'बमेरा'.. तुमसे मिला नही मगर तुम्हारी छाँव को अब तुम्हारे बेटे की तस्वीर में निहार रहा हूँ ।
अलविदा ....... 'बमेरा' तुम गए नही, यादों में सदा रहोगे ।


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